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🌬️ हिचकी — जहाँ भावना और विज्ञान मिलते हैं

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🌬️ हिचकी — जहाँ भावना और विज्ञान मिलते हैं ✍️ लेखक : विनय तिवारी  पुराने लोग कहा करते थे — “कोई तुम्हें याद कर रहा है, इसलिए हिचकी आ रही है।” शायद इसमें कुछ सच्चाई भी है, क्योंकि जब हम किसी को मन से याद करते हैं, तब हमारी सांसों की लय बदल जाती है, और यह वही लय है जो शरीर के भीतर डायाफ्राम नाम की मांसपेशी संभालती है। डायाफ्राम पेट के ऊपरी भाग में स्थित एक गुंबदाकार पेशी है, जो फेफड़ों को ऊपर-नीचे गति देती है। जब यह सामान्य लय में चलता है, तो हमारी सांसें शांत रहती हैं, पर जब अचानक यह संकुचित हो जाता है, तो हवा तेजी से अंदर जाती है और कंठद्वार (Glottis) तुरंत बंद हो जाता है। इसी क्षण पैदा होती है वह छोटी-सी आवाज़ — “हिक्!” यही है हिचकी की असली पहचान। हिचकी आने के कारण अनेक हैं — कभी मसालेदार भोजन, कभी जल्दबाजी में खाना, कभी घबराहट या उत्साह, तो कभी विचारों की गहराई। इन सभी स्थितियों में शरीर के भीतर तंत्रिका तंत्र और डायाफ्राम के बीच का तालमेल बिगड़ जाता है, जिससे अनैच्छिक संकुचन होता है और हिचकी उत्पन्न होती है। वैज्ञानिक दृष्टि से यह एक श्वसन-प्रतिवर्त (respiratory ref...

गिरारी सरकार चिरगांव झांसी , Village Girari, block chirgaon, district Jhansi

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“ गिरारी: एक भूली हुई विरासत ” लेखक - विनय तिवारी 11वीं शताब्दी तक यहां चंदेल वंश का शासन हुआ करता था। ध्वानि ग्राम के सामंत को गड़कुंडार (जिनागढ़) मुख्यालय पर राजस्व भेजना पड़ता है| गिरारी और ध्वानि का एक सामंत हुआ करता था। गिरारी एक आवाद ग्राम था। बेतवा के किनारे और पर्वत पर बसा हुआ यह गांव आवागमन के लिहाज से महत्वपूर्ण जगहों में से एक था। क्योंकि यहां स्थित गिरज्जा घाट पर उथला पानी होने के कारण दिन भर राहगीरो का आवागम लगा रहता था। भद्रावती (आज का भांण्डेर) उस समय बहुत विस्तृत शहर था। वहां के व्यापारी यहां से निकल कर महोवा की तरफ व्यापार करने जाते थे। गिरारी से लेकर भद्रावती तक कई जगह शिलाओं पर बने हुए चित्र इस बात का संकेत देते हैं। कुछ लोग तो यहां तक बताते हैं की ग्राम ध्वानी में भी एक चंदेल कालीन प्राचीन मंदिर है जो कहीं गांव में दबा हुआ है। गिरारी से संबंधित एक प्राचीन कहानी प्रचलित है। गिरारी को ठाकुर बाबा की जन्मस्थली माना जाता है यहां ठाकुर बाबा मंदिर के बगल में ही उनकी बहन कर्णावती का मंदिर भी बना हुआ है कर्णावती को घोड़े की सवारी करने का अत्यंत शौक ...