जहाँ भाषा नहीं, वहाँ भी प्रेम बोलता है
कुत्ते का प्रेम जहाँ भाषा नहीं, वहाँ भी प्रेम बोलता है ✍️लेखक : विनय तिवारी (सत्य घटना पर आधारित) मनुष्य अक्सर यह भ्रम पाल लेता है कि संवेदना उसी की बपौती है। परंतु कभी-कभी जीवन ऐसे दृश्य दिखा देता है, जो हमारे इस अहंकार को चुपचाप तोड़ देते हैं। मैं जहाँ कार्य करता हूँ, वहीं परिसर के एक कोने में एक कुतिया ने तीन नन्हे पिल्लों को जन्म दिया। अभी उन्हें संसार देखे दस–पंद्रह दिन ही हुए थे। आँखों में धुंधली रोशनी, कदमों में डगमगाहट, और दुनिया का एकमात्र सहारा — उनकी माँ। एक दिन अचानक एक कुत्ता वहाँ आया। उसने वैसी ही पुकार भरी आवाज निकाली, जैसी माँ अपने बच्चों को बुलाती है। आश्चर्य! तीनों पिल्ले उसकी ओर भाग पड़े। माँ कुतिया सतर्क हो गई। वह दौड़ती हुई आई। उसने उस कुत्ते का मुँह सूँघा — जैसे पहचान रही हो, जैसे पूछ रही हो — “इरादा क्या है?” कुछ क्षणों की मौन बातचीत के बाद वह निश्चिंत होकर बैठ गई। पिल्ले उसके साथ खेलने लगे। उस दिन से वह कुत्ता रोज आने लगा। आता, खेलता, और चला जाता। फिर समय ने करवट ली। कुछ आवारा कुत्तों ने कुतिया पर हमला कर दिया। वह बुरी तरह घायल हो गई। दो-तीन दिन तक उ...