पार्वती और इमली का पेड़
पार्वती और इमली का पेड़
लेखक - विनय तिवारी
गांव के पूर्वी छोर पर, जहां बेतवा नदी की एक छोटी धार बहती थी, वहीं रहती थी पार्वती।
नाम बड़ा था — पार्वती!
पर स्वभाव में भय का साया हमेशा छाया रहता था।
जब बाढ़ आई, उसका घर नदी में बह गया। फिर उसने खेत की मेड़ पर नया घर बना लिया।
वह रोज मजदूरी करके लौटती — सिर पर टोकरी, आंखों में थकान और मन में भगवान का नाम।
रास्ते में एक जगह थी — सुनसान, निर्जन, पर विशाल।
वहीं खड़ा था एक पुराना इमली का पेड़, जिसकी जड़ें मानो धरती को बांधे रखती थीं।
एक दिन शाम को लौटते समय पार्वती को लगा जैसे कोई पीछे चल रहा है।
पैरों की आहट, कपड़ों की सरसराहट, और हवा में किसी के सांस लेने की आवाज़।
वह तेज़-तेज़ चलने लगी।
घर पहुंचते ही बेहोश होकर गिर पड़ी।
होश आया तो बोली —
“वो…वो सफेद कपड़े वाला… मेरे पीछे था!”
घरवाले हंसे। किसी ने कहा —
“रात का वहम है पार्वती, डर छोड़!”
पर पार्वती की आंखों में आतंक था।
अब यह रोज़ का किस्सा बन गया —
कभी “इमली से कोई कूदा”, कभी “पत्थर फेंका”, कभी “धक्का दिया”।
गांव में चर्चा फैल गई —
“इमली वाले रास्ते में कुछ है!”
धीरे-धीरे यह बात पुराने किस्से से जुड़ गई —
उसी इमली के नीचे, बरसों पहले एक बाराती मरा था।
कहते हैं, उसने इतना खाना खाया कि पेट फट गया।
और उस दृश्य की गवाह थी — पार्वती!
अब पार्वती के मन में वही चेहरा बस गया था —
सफेद कुर्ता, पायजामा और भरा हुआ चेहरा।
उसे लगता, वही आत्मा अब भी पेड़ पर भटक रही है।
जब मोहल्ले के एक आदमी ने भी “सफेद कपड़े वाले” को इमली के पास घूमते देखा —
तो कहानी को पर लग गए।
पार्वती ने फिर एक दिन अंतिम उपाय किया —
पंडित से ताबीज़ बंधवाया —
मछली के दांत, उल्लू की आंख और कबूतर का नाखून —
सब एक कपड़े में बांधकर गले में डाल लिया।
500 रुपये गए, पर उसे शांति मिली।
और जब कुछ दिनों बाद आंधी में इमली का पेड़ गिर गया,
तो पार्वती खिल उठी —
“देखो, अब वो गया… अब वो नहीं आएगा!”
लेकिन इमली की जगह कुछ महीने बाद वहीं पीपल उग आया…
गांव के लोग कहते हैं —
“इमली गिर गई, पर आत्मा को नया घर मिल गया!”
और पार्वती?
अब वह उसी नदी किनारे रहती है, जहां उसका पुराना घर था —
बस फर्क इतना है कि
अब भी शाम होते ही, वह आंखें बन्द कर लेती है
और धीमे से कहती है —
“जय महाकाल… बचा लेना।”
भावार्थ
यह है की एक मुसीबत जाती है तो दूसरी तुरंत जन्म ले लेती है मुसीबत से घबराए नहीं।
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